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कांग्रेस पर बरसीं प्रमिला पांडेय, बोलीं- संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना राजनीतिक हताशा

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प्रमिला पांडेय ने कहा- चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय कांग्रेस करे आत्ममंथन

स्वप्निल वरुण बोले- निर्वाचन आयोग की स्थिति स्पष्ट होने के बाद आरोपों को लेकर जनता के बीच भ्रम नहीं फैलाना चाहिए

अरविन्द पाण्डेय 

कानपुर। चुनावी मुद्दों और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर कानपुर की महापौर प्रमिला पांडेय और जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण ने निशाना साधा। सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में दोनों नेताओं ने कांग्रेस से चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय अपने राजनीतिक और संगठनात्मक प्रदर्शन का आत्ममंथन करने की बात कही।

महापौर प्रमिला पांडेय ने कहा कि चुनाव में हार के बाद जनादेश स्वीकार करने के बजाय निर्वाचन आयोग और अन्य लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाना राजनीतिक हताशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए जनता का विश्वास हासिल करना जरूरी है और हार के बाद संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने के बजाय राजनीतिक दलों को अपनी कमजोरियों पर विचार करना चाहिए।


निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस पर उठाए सवाल

प्रमिला पांडेय ने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से चुनावी प्रक्रिया और एसआईआर जैसे मुद्दों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की गई है। उन्होंने दावा किया कि इसके बावजूद कांग्रेस लगातार ऐसे आरोप लगा रही है, जिनसे जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी निर्णय या प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए संवैधानिक और न्यायिक मंच उपलब्ध हैं।

महापौर ने कहा, “कांग्रेस को अब आरोपों की राजनीति से बाहर निकलकर आत्ममंथन करना चाहिए। जनता को भ्रमित करने से न तो जनादेश बदलेगा और न ही संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कम होगी।”

स्वप्निल वरुण बोले- पत्र और फॉर्म-6 को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप

जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण ने कहा कि कांग्रेस की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर जिस तरह राजनीतिक विवाद खड़ा किया गया, निर्वाचन आयोग की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद उसकी वास्तविक प्रकृति सामने आई। उन्होंने दावा किया कि संबंधित पत्र किसी चुनावी नीति या आईटी प्रभाग से जुड़ा नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से संबंधित आंतरिक मामला था।

स्वप्निल वरुण ने फॉर्म-6 को लेकर भी कांग्रेस और विपक्ष पर जनता के बीच भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एसआईआर के संदर्भ में फॉर्म-6 से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर न्यायिक स्तर पर भी सुनवाई हुई है। निर्वाचन आयोग की वर्तमान मतदाता सेवाओं में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 का प्रावधान मौजूद है।

सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के फैसले में बिहार की एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े कानूनी सवालों पर विचार किया गया था। अदालत के निर्णय में एसआईआर की वैधानिकता और उससे जुड़ी प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई है।


पात्र मतदाताओं तक पहुंचने की प्रक्रिया पर भी चर्चा

स्वप्निल वरुण ने कहा कि निर्वाचन आयोग का उद्देश्य पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, मजदूरों और बेघर नागरिकों तक पहुंचने तथा छूटे हुए पात्र लोगों की प्रक्रिया पूरी कराने जैसे प्रयास भी इसी दिशा में किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक निशाना बनाने के बजाय अपने संगठन और कार्यप्रणाली पर ध्यान देना चाहिए। यदि किसी निर्णय या प्रक्रिया पर आपत्ति है तो लोकतांत्रिक और न्यायिक मंचों पर उसे उठाया जा सकता है।


ईवीएम और निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाने के बजाय आत्ममंथन की सलाह

महापौर प्रमिला पांडेय ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना भी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि चुनावी हार के बाद ईवीएम और निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय कांग्रेस को जनता के बीच अपने काम, नीतियों और संगठन की स्थिति को लेकर जवाब देना चाहिए।

स्वप्निल वरुण ने कहा कि जनता आरोपों के बजाय तथ्यों को जानना चाहती है। उन्होंने कांग्रेस से आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से आगे बढ़कर लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखने की दिशा में काम करने की अपील की।

दोनों नेताओं ने कहा कि जनादेश का सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रेस वार्ता में भाजपा जिला मीडिया प्रभारी अनुराग शर्मा भी मौजूद रहे।

 

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